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बुधवार, १५ मे, २०१९

॥ आए दिन भक्त मिलते हैं ॥

( ’२०१९ की कविताएं’ में समाविष्ट)

भक्त दीनदयाल रोड पर मिलते हैं ।
भक्त बारामती होस्टलमें बसते हैं ।

भक्तोंका डेरा मातोश्री के दरबारमें है ।
भक्तोंका मेला कृष्णकुंज के द्वार पे है ।

भक्त कभी 'कापिताल' लिए घूमते हैं ।
भक्त साइकिल पे बैठा हाथी देखते हैं ।

भक्त ’समोसे में आलू’ रखते हैं ।
भक्त अन्योंको ’तृण’वत मानते हैं ।

भक्तोंके लिए नेता ही परमभगवान हैं । 
उसकी चरणोंमे ही उनका उत्थान है।

उसकी हर उक्ती अंतिम सत्य मानते हैं।
उसकी हर कृती आशीर्वाद मानते हैं ।

भक्तोंका भगवान गिर पडे,
तो उसे 'भूमाता-वंदन' कहते हैं।

सहसा वो वायुविजन करे,
तो मलय-गंध-युक्त मानते हैं ।

आए दिन भक्त मिलते हैं...
...भक्त अब ’२४ अकबर रोड’पर भी दिखने लगे हैं।

- परमभक्त रमताराम


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कवितेसोबत जोडलेले संकल्पचित्र http://dreamtime.com येथून साभार

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